“देखिये पासवान साहब, आप मेरे पिताजी के समान है, अब पिता के पैसे पर पुत्र का कुछ न कुछ तो अधिकार होता ही है। बीस हज़ार रुपये दीजिये मैं रात दिन एक करके आपकी फ़ाइल ढूंढ निकालूँगा।” कहते हुए गंगा बाबू ने मुंह के भीतर दबे पान का स्थान परिवर्तित करते हुए दायीं दाढ़ सेContinue reading “पेंशन (हास्य-व्यंग्य कहानी)”
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मेरा अनफिक्स्ड क्रिकेट मैच (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
गिल्ली डंडा खेलने वाली अन्तिम और गली में क्रिकेट खेलने वाली प्रथम पीढ़ी होने का सैभाग्य हमारी पीढ़ी के नाम ही जाता है। सशरीर खेले जाने वाले खेल हमारी पीढ़ी ने इतना खेल डाले कि वर्तमान पीढ़ी को खेलने के लिए कुछ बचा ही नही। विज्ञान को विवश होकर वीडियो गेम मोबाइल गेम और पबजीContinue reading “मेरा अनफिक्स्ड क्रिकेट मैच (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”
रामलीला टू पॉइंट ओ (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
कानपुर के जगन्नाथ की रामलीला पार्टी बहुत मशहूर थी उन दिनों। बहुत बढ़िया रामलीला खेलते थे। जगन्नाथ पार्टी मालिक थे इसलिये पैसा बचाने के लिए उन्हें खुद बहुत से रोल करने पड़ते थे। जनक, भरत, केवट और सुलोचना का चरित्र ऐसा उतार देते थे कि स्वर्ग से असली वाले किरदार भी सोचने पर विवश होContinue reading “रामलीला टू पॉइंट ओ (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”
तलाक़-ए-नूर (हास्य-व्यंग्य कहानी)
नूर मोहम्मद केवल उनका नाम ही था, जबकि न तो उनमे नूर था और न ही मोहम्मद। वे खुदा के फज़ल से बदसूरत नहीं थे बल्कि खुद की कोशिशों से उन्होंने ये बदसूरती डेवलप की थी। नूर मोहम्मद नौ बच्चों के बीच इकलौते बाप थे। वैसे तो नसरीन बेगम उनकी शरीक-ए-हयात थी, लेकिन उनकी जिन्दगीContinue reading “तलाक़-ए-नूर (हास्य-व्यंग्य कहानी)”
आला (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
कन्नौजिया मास्टर सोफे पर कुछ इस तरह से विद्यमान थे कि उन्हें देखकर ठीक-ठीक अनुमान लगाना कठिन था कि वे बैठे हैं, या लेटे हैं। बैठने और लेटने के बीच की एक नयी किस्म की वैराइटी उन्होंने ईजाद की थी। जिस अवस्था मे वे इस समय अवस्थित थे, उस स्थिति में सोया भी जा सकताContinue reading “आला (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”
प्रेमपत्र (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
अन्य कापियों की अपेक्षा भूगोल की कॉपी थोड़ी लम्बी होती थी, इसलिए प्रेमपत्र लिखने के लिए उसके पन्ने बड़े मुफीद माने जाते थे उनदिनों। मुजीब ने उसी कॉपी से एक पेज फाड़ा किन्तु इश्क के चक्कर मे यह ध्यान भी नही दिया कि दो पन्ने एक मे ही जुड़े होते है और दूसरे पेज मेंContinue reading “प्रेमपत्र (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”
बाबागिरी
छंगा उनका ओरिजिनल नाम नही था, लेकिन कहते सब उन्हें छंगा ही थे। यहां तक कि राशन कार्ड और वोटर आईडी भी इसी नाम से बन गयी थी। केवल हाईस्कूल फेल की मार्कशीट के अनुसार उनका नाम विद्या प्रकाश था। हाईस्कूल पास होने के कोई फायदे हों या न हों पर छंगा को हाईस्कूल फेलContinue reading “बाबागिरी”
फेसबुक लाइव (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
नरेश कायमगंजी ग्रामसभा स्तर के अखिल भारतीय कवि हैं। ये उस ज़माने से कवि हैं जब कवि सम्मेलन और मुशायरा एक ही मंच पर बिना किसी विवाद के हो जाते थे। शायर सरस्वती वंदना और कवि नात बर्दाश्त कर लेते थे। गंगा-जमुनी तहजीब इस कदर थी कि मुस्लिम श्रोता हिन्दू कवियों को हूट भी नहीContinue reading “फेसबुक लाइव (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”
शेरवानी (हास्य लघुकथा)
नौशाद वाच रिपेयर हाउस एंड आलम ब्रास बैण्ड दरअसल एक ही व्यक्ति के एक ही दुकान में दो अलग-अलग प्रकार के बिजनेस थे। मालिक नौशाद आलम दिन में घड़ियों में समय बजाते थे और रात में शादियों में बाजा। देशी, विदेशी, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमेटिक, पंजाबी, फिल्मी, भोजपुरी और अश्लील हर प्रकार की घड़ी और गानों मेंContinue reading “शेरवानी (हास्य लघुकथा)”
तेरा तुझको अर्पण (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)
गंगादीन खुशी मन से घर की ओर जा रहे थे। सरकार ने जनधन खाते में जो 500 रुपये डाले थे वह आज उसने निकाल लिए थे। सामाजिक संस्थाओं के लोग आटा, दाल, सब्जी आदि एक सेल्फी के बदले में दे जाते थे। पूरे लॉक डाउन में उसे खाली पेट कभी न सोना पड़ा।आज बहुत दिनोंContinue reading “तेरा तुझको अर्पण (हास्य-व्यंग्य लघुकथा)”