1.दाल मँहगी है अगर? कम खाइए,व्यर्थ मत सरकार को गरियाइये।हो गया पैट्रोल महँगा, क्या हुआ?भागिये! खुद फटफटी हो जाइये।।2.महँगा हुआ पैट्रोल, तो थोड़ा खरीदिये,अच्छा विकल्प है, अगर घोड़ा खरीदिये।ट्रैवलिंग के साथ राइडिंग का लुत्फ लीजिये-औ’ पाँच किलो लीद रोज़ मुफ्त लीजिये।।3.मोदीजी हम अन्दर तक हिल जाते है,गाड़ी में जब भी पैट्रोल भराते हैं।जितने में पहले Continue reading “पैट्रोल”
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अस्पताल (हास्य-व्यंग्य कहानी)
वह कुत्ता वाकई कुत्ता ही था। सड़क के बीचो-बीच पहुँच कर उसने अपना निर्णय बदल दिया। मुँह की दिशा के हिसाब से उसे आगे जाना चाहिए था, लेकिन वह मुंह के विलोम की तरफ से उल्टा भागा। पीताम्बर अपनी मोटर साइकिल से ठीक-ठाक गति में आ रहे थे। उन्होंने कुत्ते के पीछे से निकलने काContinue reading “अस्पताल (हास्य-व्यंग्य कहानी)”
जलेबीनामा (हास्य-व्यंग्य लघुकथा) -राजेन्द्र पण्डित
चौकोर समोसे, ठोस कड़ी आइसक्रीम, च्युंगम के टक्कर की रसमलाई और छेनी-हथौड़ी से तोड़कर खाने लायक खस्तों की अपार सफलता के बाद, आज पत्नी ने जलेबी बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामिग्री की लिस्ट थमाते हुए कहा, “आज खाना-वाना नही बनेगा। जलेबी बनाना यू ट्यूब से सीखा है। फटाफट ये सब ले आओ। गरमागरम जलेबीContinue reading “जलेबीनामा (हास्य-व्यंग्य लघुकथा) -राजेन्द्र पण्डित”
कल्लन का कोट (लघुकथा)
नाम तो उनका कुछ और था लेकिन कहते सब उन्हें कल्लन ही थे। कुछ लोग प्यार से तो कुछ उसके विलोम के कारण उन्हें इस नाम से पुकारते थे। कल्लन उस समय पाँचवी और अंतिम कक्षा में बैठते थे। वे और उनके पिता इस बात से पूरी तरह आश्वस्त थे कि ज़्यादा पढ़ाई लिखाई करनेContinue reading “कल्लन का कोट (लघुकथा)”